Friday, September 9, 2011

meditating on God’s Law

Psalm 119:15, 97, and 148 (meditating on God’s Law)
                15 मैं तेरे उपदेशों पर ध्यान करूंगा, और तेरे मार्गों की ओर दृष्टि रखूंगा।
                97 अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है।
                148 मेरी आंखें रात के एक एक पहर से पहिले खुल गईं, कि मैं तेरे वचन पर ध्यान करूं।
Psalm 1:2(Blessed is the one, who meditates on his law day and night)
                 2 3 वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है। और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। इसलिये जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होता है॥
Gen 24:63(Isaac went out to the field to meditate)
                63 और सांफ के समय वह मैदान में ध्यान करने के लिथे निकला या : और उस ने आंखे उठाकर क्या देखा, कि ऊंट चले रहे हैं।
Jos 1:8(Meditating on God’s word makes us prosperous and successful)
            8 व्यवस्या की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी उतरने पाए, इसी में दिन रात ध्यान दिए रहना, इसलिथे कि जो कुछ उस में लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी करे; क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सुफल होंगे, और तू प्रभावशाली होगा।
Psalm 77:12(meditating on God’s mighty deeds)
                12 मैं तेरे सब कामों पर ध्यान करूंगा, और तेरे बड़े कामों को सोचूंगा।

Psalm 143:5(meditating on God’s wonderful works in our life)
                5 मुझे प्राचीन काल के दिन स्मरण आते हैं, मैं तेरे सब अद्भुत कामों पर ध्यान करता हूं, और तेरे काम को सोचता हूं।
Psalm 145:5(meditating on God’s wonderful works in our life)
                5 मैं तेरे ऐश्वर्य की महिमा के प्रताप पर और तेरे भांति भांति के आश्चर्यकर्मों पर ध्यान करूंगा।

No comments:

Post a Comment