Mt 23:37(God longs to have us under His wings)
37 हे यरूशलेम, हे यरूशलेम; तू जो भविष्यद्वक्ताओं को मार डालता है, और जो तेरे पास भेजे गए, उन्हें पत्थरवाह करता है, कितनी ही बार मैं ने चाहा कि जैसे मुर्गी अपने बच्चों को अपने पंखों के नीचे इकट्ठे करती है, वैसे ही मैं भी तेरे बालकों को इकट्ठे कर लूं, परन्तु तुम ने न चाहा।
Psalm 57:1(my God, have mercy on me, for in you I take refuge)
1 हे परमेश्वर, मुझ पर अनुग्रह कर, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तेरा शरणागत हूं; और जब तक ये आपत्तियां निकल न जाएं, तब तक मैं तेरे पंखों के तले शरण लिए रहूंगा।
Psalm 61:4(I long to dwell in your tent forever and take refuge in the shelter of your wings)
Isa 31:5(God almighty will shield us, deliver us and rescue us, like a bird hovering overhead)
5 पंख फैलाई हुई चिडिय़ोंकी नाईं सेनाओं का यहोवा यरूशलेम की रझा करेगा; वह उसकी रझा करके बचाएगा, और उसको बिन छूए ही उद्धार करेगा।।
Ruth 2:12(May you be richly rewarded by the LORD, the God of Israel, under whose wings you have come to take refuge)
12 यहोवा तेरी करनी का फल दे, और इस्राएल का परमेश्वर यहोवा जिसके पंखोंके तले तू शरण लेने आई है तुझे पूरा बदला दें Dt 32:10, 11 (God is protecting us like an eagle that stirs up its nest and hovers over its young)
10 उस ने उसको जंगल में, और सुनसान और गरजनेवालोंसे भरी हुई मरूभूमि में पाया; उस ने उसके चंहु ओर रहकर उसकी रझा की, और अपक्की आंख की पुतली की नाई उसकी सुधि रखी।।
11 जैसे उकाब अपके घोंसले को हिला हिलाकर अपके बच्चोंके ऊपर ऊपर मण्डलाता है, वैसे ही उस ने अपके पंख फैलाकर उसको अपके परोंपर उठा लिया।।
11 जैसे उकाब अपके घोंसले को हिला हिलाकर अपके बच्चोंके ऊपर ऊपर मण्डलाता है, वैसे ही उस ने अपके पंख फैलाकर उसको अपके परोंपर उठा लिया।।
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